11-24-2023 21:14:37 Interview with my Dadi
Description
I interview Dadi about early life in India as a woman, raising my Dad and uncles, and advice for the future generations of our family. Dadi also gives some wisdom for anyone in the world who is listening.Participants
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Armaan Lalani
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Nargis Lalani
Interview By
Keywords
Initiatives
Transcript
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00:00 नरगीश है, नरगीश, जुनाकेडसेहूँमेरी सेवंटी और मेरे 3 बच्चे हैं, 3 बोहे, 3 ग्रैंड सीलन है लोट.
00:23 मेरा नाम अरमान है, मैं न है और आज नvmrtwntीfor और.
00:30 मैं.
00:32 दादी से बात कर रहा हूँ।
00:34 का.
00:36 दुबई के अन्दर दुबई दादी जी जब आप यंग थे.
00:42 लाइफ कैसा था हमारे जमाने में लाइफ लडकियों के लिए, वो जो हमारे घर में जो थे, वो वो कोन सी टी थी, हमको बहुत पढ़ने की छूट नहीं थी, बाहर जाने की छूट नहीं थी को कहीं देरी से जाने नहीं देते थे, शाम को जल्दी घर पर आ जाना पड़ता था। अगर कहीं जाना भी हो शादी या कहीं फंक्शन में भी तो हमारे माँ बाप या हमारे बड़े भाई को हमारे बुजुर्ग हो कोई हमारे साथ आते थे, हमको कभी बात अकेले नहीं जाने देते थे। और अभी जो सब लोग बचिया पढाई कर रहे हो भी तब तलक पढाई भी नहीं थी। कॉलेज में तो कोई लड़की आ जाती थी, बस हमारे ज़माने में ओलडएसीसीथामिगयारह की पर ही थी, बस तब लग बच्चियों को पढ़ाते थे, फिर बोलते थे की बस उसकी शादी कर 2 अच्छा लड़का देखो और उसके घर पर भेज 2 अभी अलग जमाना हो गया है। अभी माँ बाप भी समझते हैं कि नहीं बच्चों को पढ़ाना चाहिए, इतनी जल्दी शादी करनी नहीं चाहिए। उसके पाँव पर वो खड़ी हो गयी, उसमें थोड़ी मेचोरिटी दुनिया दारी समझे तो वो बहुत अच्छा। क्योंकि लड़कियां जो अगर पढ़ी लिखी होगी तो जहाँ शादी करके भी जाएगी तो जो उसकी नेक्सट जनरेशन होगी वो उसको भी पढ़ाएगी। तो आगे ज्यादा। अच्छा अच्छी बात है न। खुद माँ जो नहीं पढ़ी होगी तो वो बच्चे को क्या पढ़ेगा। इस जमाने अब भी जमाने में लाइपीबहुतफास हो गई है तो लड़के को कमाने के लिए बाहर जाना पड़ता है तो लड़कों माँ को ही सब संभालना पड़ता है। एजुकेशन या स्कूल के लिए, बच्चों के लिए स्कूल में जाना पड़ता है। पैरेंट्स मीटिंग होती है या कोई एक्टिविटीज होती है तो माँ ही सब जगह जाती है। कुछ भी प्रॉब्लम हो तो बच्चियां भी माँ के साथ शेयर करती है की मम्मी ये है वो है ज्यादातर बच्चियां माँ के साथ क्लोज होती है तो अभी का ज़माना ज्यादा अच्छा है, लड़कियां भी बाहर पढ़ने भी जाती है। हमारे जमाने में हो जाते थे तो अमदाबाद जामनगर या बॉम्बे के थे, इसके आगे कोई कहीं नहीं जाता था। अभी जो जाते है तो एबरोडसबझातेहछोटे छोटे गाँव में, ऐसे भी हमारे छोटे छोटे गाँव है, वहाँ से भी नेडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सब बच्चिया पढने भी जाते और माँ बाप भी उसको भेजते है, घबराते नहीं है कैसे भेजे लड़के तो जाते है, मगर भी जाती है। वो भी बहुत ही अच्छी बात है, अपने को कहते हैं, कुरान में भी लिखा है। अगर तुम्हारे 2 बच्चे होगे, 1 लड़का हो, लड़की हो, तुम लड़की को ज्यादा पढ़ा क्यूँकी लड़की होगी तो वो 2 फैमिली को आगे बढ़ाएगी। वो ज़माने में भी ऊपर ऐसा था, उसको पढ़ना जरूरी है.
04:01 बहुत ब्यूटिफुल है आपकी आपकी पूरी लाइफ में जी, आपका नंबर ऑन बिगेस् स्ट्रगल ख्यात स्ट्रगल स्ट्रगल चैलेंज।
04:16 मेरी शादी बहुत छोटी उम्र में हो गयी थी और तभी में.
04:20 आप कितने साल के थे। 17 साल.
04:21 की थी तो जब पढ़ती थी तब हमारे जमाने में मिस गर्मी थी, मैंने अभी मेरी एग्जाम भी खत्म नही करी थी और मेरी शादी हो गई और मगर मेरे ससुराल वाले पढ़े लिखे थे, तो उन्होंने मेरे बोला की नहीं तुम आगे पढाई कर सकती हो, मगर मेरे घर के ऐसे समझोगे हुए की मैं कुछ पढ़ नहीं सकती, मगर मेरे को हमेशा ऐसा होता है, पढ़ी लिखी होती तो ज्यादा अच्छा होता, इसमें भी ज्यादातर इंग्लिश, इंग्लिश इज द विंडो इन द वर्ल्ड और मैं समझती हूँ की अगर पॉवर इज द नॉलेज आपके पास नॉलेज होगे तो आप दुनिया के कहीं भी जाओगे, कुछ न कुछ आप अपना रास्ता निकाल लोगे। तो जब मेरी शादी हो गई तब मैं पढ़ी लिखी नहीं थी मगर मैं ऐसी लगती थी की मेरे हसबंड पड़े लिखे थे। तो जब बच्चे थोड़े बड़े हो गए मेरे को थोड़ा टाइम मिला तो मैंने एफ और एपल से पढ़ना शुरू किया और आज मैं अच्छी तरह से बुक पढ़ रही हूँ, टाइम शॉप इंडिया पढ़ रही हूँ, बाहर जान जाते हैं तो कहीं कहीं ऐसी एडवटाइज आती है, छोटी छोटी स्टोरी आती है ऐसा सब में पढ़ सकती हूँ। तो वो मेरे को होता है की नहीं पढ़ने के लिए कोई उम्र नहीं होती, उमर 1 काउंट बस नंबर हो उसे कोई बड़ी बात नहीं, अन्दर ऐसी होना चाहिए। मेरे को पढ़ना है मेरे को कुछ करना है लाइफ में कुछ आगे बढ़ ना। तो इसके लिए मैंने इतने साल बाद समझो ने 50 साल बाद मैंने पढ़ना शुरू किया और आई कैन डिड इंग्लिश वेरी वेल वेल मेरी 1 ऐसी विष भी है थोड़ी मेरे हसबैंड की तबियत अच्छी हो जाएगी तो मैं ओनर वॉलेंटरी बच्चों को पढ़ाने जाऊgmyisisfulfil।
06:33 Englis bhot e important.
06:38 English is the nesesarylotoplngag in the woर्l्ड ामपलइंग्लिश रशियन जापनीज फ्रेंच गुजराती वर्मिंग बट इंग्लिश, इज द मोस्ट, इमपोर्टंट बिकॉज, इंग्लिश, इज द इंटरनेशनल लैंग्वेज, इंग्लिश, इस एयरपोर्ट पोस रेलवे बैंकिंग everyveris इंग्लिश in the स्पीक नो नो अदर लैंग्वेज, so english is the most important in english is the international language, so i think english is the best and english is a very easy language, mar very finish i like english.
07:30 इंग्लिश बहुत ही इम्पोर्टेंट इंटरनेशनल लैंग्वेज है, यह मेरे लिए मेरे को इंग्लिश आती है, आ जाते हो की मेरे लिए और रिवर आर्यन सबके लिए सब बच्चों के लिए हिंदी और गुजराती है यह आपको.
07:53 जितनी भी दूसरी लिंक वे जाएगी तो अच्छा है, आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा ही दूसरी जगह भी जाओगे तो समझो इंग्लिश के सिवा कोई अलग कोई कंट्री में जाओगे। तो अगर आपको अलग, कोई भाषा आएगी तो वो अच्छी ही बात है न कुछ भी आपको आयेगा वो तो आपका प्लस पॉइंट ही है, इंग्लिश सिवा भी कुछ सीख सकते हो इसमें कोई दिक्कत नहीं है और हिंदी.
08:16 गुजराती के लैंग्वेज है। तो अब कितने साल के थे जब पापा पैदा हुआ.
08:32 में 17, 17 साल को 17 17 साल सतरह.
08:36 साल में शादी हुई.
08:37 18 वर्ष से सो.
08:43 पापा रईस करने में कैसा कैसा था.
08:52 या मेरे को मुश्किल नहीं पड़ी मगर क्या ऐसे घर से सब समझो मेरे मैं और मेरे हसबंड अकेले देते थे और कोई हमारी फैमिली, हम लोग साथ नहीं देते तो इसके लिए थोड़ी बहुत दिक्कतें होती है ओर कोई मेरे को मजा नहीं आया.
09:12 आप क्या कितने छोटे थे जी, वह है नहीं फिर भी फिर भी.
09:18 नहीं मरा क्योंकि मैं अपने घर में, मेरे मायके में में सबसे बड़ी थी, मेरे से 2 छोटे भाई थे और न थे। तो क्या मैंने उनको बड़े किए थे तो वो मेरे एक्परंसथानेबच्चों को कैसे हैंडल करते हैं। फिर वो उसी टाइम मेरी मम्मी ही थी, वो भी गुजर गए थे तो मैं अपने भाइयों को ज्यादा कर करती थी.
09:42 इसके लिए मेरे को है और पापा पापा और रुबिन चार्च रुबिन इसमें ऐसी कौन ज्यादा मस्ती मस्ती था मस्ती रुबिन रुबिन.
09:55 सबसे सबसे ज्यादा रुबिन, वो इतना एक्टिव था कभी भी 1 जगह बैठ नहीं सकता था अच्छे दिन में 1 दफा तो वो गिरता ही था और मेरे को शाम को उसको लेकर दवा के जाना पड़ता था कुछ न कुछ गिरे, कुछ लगे, कुछ कुछ मस्ती करके वो आता था। स्कूल में आता था तो तो कपड़े यूनिफॉर्म ने सब फट गए, धूल वाले ले दे के करके आता था.
10:27 शामत में आया, स्कूल में.
10:32 कंप्लेन आया इस कम्प्लेन नहीं आती थी कभी मरता नहीं था मगर की गाडी थी उसकी आपके पास कोई.
10:42 स्टोरी है।
10:48 2 है ऐसा वो बहुत ही छोटा था तो मेरे हसबंड स्ट्रगल कर रहे थे तो कुछ कूटर साइकिल थी तो उसके पापा के साथ वो साइकिल पर बैठ के आता आ रहा था तो उसके पाँव में फेक्चर आया था पास गए और 3 महीने का उसको फेक्चर का वो पाटा लगाया था मगर वो इतना मस्ती कर ता था तो वो बैठ नहीं सका जैसे चलते चलते बैठे बैठे चला करता था तो उसे खुद बा खुद पाटा निकाल गया। 3 महीने तो लग नहीं रहा का पाटा.
11:33 आपको कुछ और बोलना है ये ये स्टोरी.
11:37 मेरे को खास, मेरे बच्चे को बोलना, मेरे ग्रांड को बुला के अगर तुम लोग पढो और सबसे ज्यादा मैं कहीं हीं कहीं जाती हूँ मैं पीस भी देती हूँ, वो स्कूल में जाती हूँ, मैं लेडिस हूँ में कहीं बहुत ही जगह में मेंबर भी और बहुत जगह में अपना लेक्चर भी देती हूँ। और हमेशा मैं 1 बात जरूर कहती हूँ की ऑनेस्टी इज द बेस्ट पॉलिसी तुम दुनिया के कोई भी कोने में जाओ मगर आप ओनेस्ट होगे तो कोई न कोई कहीं न कहीं आपको याद रखेगा मैंने इतनी अपनी उम्र में मैं बहुत जगह फेरी हूँ, कनाडा गयी हूँ, यूरोप गयी हूँ, अमेरिका गयी हूँ, बहुत ही जगह मैंने फ्री हूँ हमेशा मैंने देखा अजोर किया है मैंने देखा है ये क्या है अगर तुम्हारा कॉन्फिडेंस अपने खाली सिम्पल फाइल ड्रेड के कपड़े पहना हो तो भी चले जरूरी ही अर्बन का शूट पहना हो मगर आपका कॉन्फिडेंस आपकी ओनेस्टी वो ही जरूरी है आपकी बॉडी लैंग्वेज आप खड़े हो, किस से बात करते हो हमेशा आपको आँख से आँख मिला कर बात करनी चाहिए आपके दिल में अगर कोई खोट नहीं तो क्यों घबराना आप आँख से आँख मिला कर बात करो सामने सी आई सी आई मिला के बात करो तो जो बात तुम उनको कहना चाहते वो सुनेगा को समझेगा और मैं हमेशा बच्चों को कहने वाली हूँ तो इतने सब पढाई में बहुत ही स्कोप हो गया है मगर मेडिकल में अगर तुम जाओ तो वो ज्यादा अच्छा है क्यूंकि वो मेडिकल ऐसी चीजें और एजुकेशन के वो दुनिया जब तक लग रहेगी उसकी जरुरत पड़ेगी अन्य अगर आप समझो के खुदा ने आपको दिया है तो आप वॉलेंटरी भी कर सकते हो। तो मैं भी ऐसा चाहती हूं कि मेरे बच्चे भी मेडिकल में जाए या कोई हार्ड पेसचालीबने या कोई ऐसी अलग अलग अलग में वो पोता नहीं मास्टर री एक्टिविटी करके आगे जाए ऐसा मैं सोचती हूँ क्यूंकि खाली पैसा कमाना जरूरी नहीं है अपन को भी सटिसफेकशन होना चाहिए कि हम दुनिया में आए तो हमने कुछ किया। खुदा ने हमको दुनिया में भेजा तो कुछ समाज को भी अपनी देवे अपन समाज को भी देते तो अपन को अच्छा लगता। इसके लिए मैं भी ऐसा बोलती हूँ कि खुदा ने अपने इधर भेजा है तो पन की दुनिया वालों के लिए कुछ न कुछ करें।
14:31 थैंक यू सो मच ओके।